SEBI: Net Settlement of Cash and FO Segment Upon Expiry

सेबी ने फ्यूचर एंड ऑप्शन में रिटेल शार्ट सेलर की मुश्किलें आसान करने के लिए Net Settlement of Cash and FO की व्यवस्था की। इस नए प्रबंध का मतलब आज हम समझेंगे।

Net Settlement of Cash and FO: From March 2023

सेबी फिजिकल सेटलमेंट का नया नियम मार्च 2023 की एक्सपायरी से ला रही है। इस नियम के अनुसार, अगर आपका F&O का ट्रेडिंग मेंबर (TM) और कैश सेगमेंट का क्लीयरिंग मेंबर (CM) एक ही है तो, अब फिजिकल सेटलमेंट Net basis पर होगा। अभी तक ये सेटलमेंट अलग अलग होती है। यानि, शार्ट पोजीशन की डिलीवरी देने के लिए जो शेयर आप का ब्रोकर ऑक्शन में बाजार से खरीदता है और जो F&O में आप डिलीवरी देते हैं, वे दोनों सेटलमेंट अलग होती है। अब इन दोनों को आपस में नेट ऑफ किया जायेगा। इस नियम को अनुसार, रिटेल निवेशकों को STT और Stamp Duty पुराने नियमों के अनुसार ही देनी होगी अर्थात् कैश और F&O की अलग अलग।

Net Settlement of Cash and FO is written and animated on a weighing scale.
Net Settlement of Cash and FO Segment Upon Expiry

Net Settlement of Cash and FO: Not for Institutional Investors

ये Netting of settlements सिर्फ रिटेल निवेशकों के लिए है। इसका फायदा Institutional Investors जिनमें कि FPI शामिल हैं नहीं उठा पाएंगे।

What is Physical Settlement

नवंबर 2019 से वायदा बाजार की एक्सपायरी से स्टॉक डेरिवेटिव पर फिजिकल सेटलमेंट लागू है। फिजिकल सेटलमेंट का मतलब है कि फ्यूचर एंड ऑप्शन की एक्सपायरी के दिन वे कॉन्ट्रैक्ट जिनको खरीद/बेच कर खत्म नहीं किया जाता, उनका सेटलमेंट नकद की जगह डिलीवरी से होगा। इसका मतलब अगर आपके पास किसी शेयर की F&O में एक्सपायरी के बाद ओपन पोजीशन है, तो वह डिलीवरी में सेटल होगी।

Physical Settlement in Stock Futures

अगर आपने कोई फ्यूचर खरीद रखा है तो आपको उस शेयर के लोट साइज के बराबर शेयरों की डिलीवरी मिलेगी। आपको उस शेयर के एक्सपायरी वाले दिन के बंद भाव से लोट साइज को गुना करने के बाद पेमेंट देनी होगी। अगर किसी ने फ्यूचर बेच रखा है, तो उसे लोट साइज के बराबर शेयरों की डिलीवरी देनी होगी। डिलीवरी के बदले उसको पेमेंट मिल जायेगा।

Physical Settlement in Stock Options

ऑप्शन में ये मामला थोड़ा अलग है। ऑप्शन में, सिर्फ इन द मनी (ITM) कॉन्ट्रैक्ट डिलीवरी से सेटल होंगे। ऑप्शन की लॉन्ग पोजीशन और शार्ट पोजीशन का अलग अलग मतलब होता है। अगर किसी ने ITM कॉल ऑप्शन खरीद रखा है या ITM पुट ऑप्शन बेच रखा है तो यह लॉन्ग पोजीशन होगी। इस स्थिति में उसको उस स्टॉक की डिलीवरी मिलेगी। अगर किसी ने ITM पुट ऑप्शन खरीद रखा है या ITM कॉल ऑप्शन बेच रखा है तो यह शार्ट पोजीशन होगी। इस स्थिति में उसे स्टॉक की डिलीवरी देनी होगी।

Net Settlement of Cash and FO: No Change for Long Positions

सेबी के इस नए नियम का फिजिकल सेट्लमेंट की लॉन्ग पोजीशन पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। लॉन्ग पोजीशन वाले को स्टॉक की डिलीवरी मिलेगी और उन शेयरों का भुगतान करना होगा।

Net Settlement of Cash and FO: Old Rule for Short Seller

शार्ट पोजीशन वालों को इस नए नियम का फायदा होगा। अगर किसी की शार्ट पोजीशन एक्सपायरी वाले दिन रह जाती है और उसके पास देने के लिए डिलीवरी नहीं है, तो उसे उन शेयरों को बाजार से खरीद कर देना पड़ता है। अभी तक जो शेयर वह बाजार से खरीदता है और जो डिलीवरी उसको फिजिकल सेट्लमेंट में देनी होती है, ये दोनों सौदे अलग अलग सेटल होते हैं। यानि शार्ट सेलर बाजार से जो शेयर खरीदेगा, उसका भुगतान करेगा और डिलीवरी उसके डीमैट अकाउंट में आएगी। उसके बाद ये शेयर F&O में डिलीवर करेगा और भुगतान प्राप्त करेगा। इस बीच में, उसको कैश में और F&O में दोनों जगह मार्जिन भी देना होता है।

Net Settlement of Cash and FO: New Rule for Short Seller

अब नए नियमों के हिसाब से इन दोनों सौदों को आपस में नेट ऑफ किया जायेगा से तात्पर्य अब शेयर खरीदने के लिए पेमेंट न करके, सिर्फ दोनो के भाव के अंतर का ही भुगतान करना होगा। उदाहरण के लिए अगर आपने कोई स्टॉक फ्यूचर बेच रखा है और एक्सपायरी वाले दिन जिसका भाव 105 रुपये सेटल हुआ है। आपको बाजार से वे शेयर 106 रुपये में मिलता है तो आपको सिर्फ 1 रूपये को लोट साइज से गुना कर के भुगतान करना होगा। जबकि पुराने नियमों के हिसाब से आपको 106x लोट साइज का भुगतान करना होता है और 105x लोट साइज से आपको अलग से भुगतान मिलता है।

Net Settlement of Cash and FO: Benefit of New Rules

नए नियम के अनुसार शेयर खरीदने का मार्जिन और भुगतान दोनों ही नहीं करने पड़ेंगे, जिससे छोटे निवेशकों को फायदा होगा।

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